Q.1: तिंगरी का विशाल मैदान कैसा दिखाई देता था?
Q.2: यात्रा में लेखक के साथ उनका कौन सा मित्र था?
Q.3: लेखक ने यह यात्रा किस रास्ते से की थी?
Q.4: जब लेखक देरी से पहुँचा तो सुमति की प्रतिक्रिया क्या थी?
Q.5: तिब्बत की कड़ी धूप से बचने के लिए लेखक क्या करते थे?
Q.6: सुमति कौन था?
Q.7: गंडा खत्म हो जाने पर सुमति क्या करते थे?
Q.8: सुमति लेखक का इंतजार कहाँ कर रहा था?
Q.9: लेखक रास्ता भटककर गलत रास्ते पर कितने मील चला गया था?
Q.10: डाँडे के देवता के स्थान को किन चीज़ों से सजाया गया था?
Q.11: लङ्कोर के मार्ग में लेखक अपने साथियों से क्यों बिछड़ गया?
Q.12: तिब्बत में 'भरिया' किसे कहा जाता है?
Q.13: 'डाँडा थोङ्ला' की ऊँचाई समुद्र तल से लगभग कितनी थी?
Q.14: तिंगरी के मैदान में स्थित पहाड़ी का क्या नाम था?
Q.15: लेखक ने तिब्बत की यात्रा किस वेश में की थी?
Q.16: तिब्बत में सबसे खतरे की जगह कौन सी मानी जाती थी?
Q.17: गुस्से में सुमति ने कितनी बार चाय को गरम किया था?
Q.18: उस समय तिब्बत की ज़मीन मुख्य रूप से किनके बीच बँटी हुई थी?
Q.19: 'ल्हासा की ओर' पाठ के लेखक कौन हैं?
Q.20: उस समय तिब्बत के समाज में कौन सी कुप्रथा नहीं थी?
Q.21: डाँडे के देवता का स्थान कहाँ स्थित था?
Q.22: शेकर विहार में लेखक को क्या मिला जिसे वे पढ़ने में मग्न हो गए?
Q.23: लेखक ने यह तिब्बत यात्रा किस वर्ष की थी?
Q.24: लेखक ने सुमति को आस-पास के गाँवों में जाने से क्यों रोका?
Q.25: डाकुओं के डर से लेखक और उनके मित्र को क्या करना पड़ता था?
Q.26: 'कूची-कूची' शब्द का क्या अर्थ है?
Q.27: सुमति अपने यजमानों को प्रसाद के रूप में क्या बांटते थे?
Q.28: भिखमंगे का रूप धारण करने पर वे दया माँगने के लिए क्या कहते थे?
Q.29: जागीरों का अधिकतर हिस्सा किसके प्रबंधन में था?
Q.30: फरी-कलिङ्पोङ का रास्ता खुलने से पहले भारत का व्यापार किस रास्ते से होता था?
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