Q.1: 'बाजार दर्शन' निबन्ध की भाषा शैली है-
Q.2: 'लेखक के दूसरे मित्र शाम खाली हाथ वापिस लोटे' खाली हाथ लौटने का कारण था-
Q.3: 'बाजार है कि शैतान का जाल है' बाजार को शैतान का जाल कहने का कारण है-
Q.4: बाजार की जादुई ताकत हमें कैसा बना देती है?
Q.5: 'बाजार दर्शन' जैनेन्द्र कुमार की गद्य की कौनसी विधा है?
Q.6: पिछले एक-डेढ़ दशक पूर्व किस विषय पर व्यापक चर्चा हुई?
Q.7: भगत जी पर बाजार का जादू नहीं चलता है क्योंकि वे-
Q.8: आपके लिए सार्थक बाजार कौनसा रहेगा?
Q.9: पैसे की उस 'पर्चेजिंग पावर' के प्रयोग में ही क्या है?
Q.10: "मन बंद हो जायेगा, वह शून्य हो जायेगा" शून्य होने का अधिकार किसे है?
Q.11: जैनेन्द्र कुमार का जन्म कब, कहाँ हुआ?
Q.12: अगर हम जरूरत को तय कर बाजार में जाने के बजाय उसकी चमक दमक में फंस गये तो हमें सदा के लिए बेकार कौन बना सकता है?
Q.13: 'बाजार दर्शन' पाठ के लेखक हैं-
Q.14: बाजार के जादू की जकड़ से बचने का सीधा-सा उपाय है-
Q.15: "बाजार में एक जादू है" वह किस रास्ते से कार्य करता है?
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