निम्नलिखित गद्यांश / पद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दें: (इस गद्यांश पर आधारित: प्रश्न सं. 1 से 6)

देखकर बाधा विविध, बहु विघ्न घबराते नहीं।
रह भरोसे भाग के, दुख भोग पछताते नहीं।
काम कितना ही कठिन हो, किन्तु उकताते नहीं।
भीड़ में चंचल बने जो, वीर दिखलाते नहीं।
हो गए एक आन में, उनके बुरे दिन भी भले।
सब जगह सब काल में, वे ही मिले फूले फले।
आज करना है जिसे, करते उसे हैं आज ही।
सोचते कहते हैं जो कुछ, कर दिखाते हैं वही।

Q.1: प्रस्तुत पद्यांश में किस प्रकार के व्यक्ति की विशेषताएँ बताई गई हैं?
Q.2: कठिन कार्य सामने आने पर वीर पुरुषों की क्या प्रतिक्रिया होती है?
Q.3: पद्यांश के अनुसार सफलता किसे प्राप्त होती है?
Q.4: 'हो गए एक आन में, उनके बुरे दिन भी भले' - इस पंक्ति में 'आन' शब्द का क्या अर्थ है?
Q.5: 'विघ्न' शब्द का पर्यायवाची इनमें से कौन सा है?
Q.6: कर्मवीर व्यक्ति भाग्य के विषय में क्या दृष्टिकोण रखते हैं?
निम्नलिखित गद्यांश / पद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दें: (इस गद्यांश पर आधारित: प्रश्न सं. 7 से 12)

समय बहुत मूल्यवान है। यह बीत जाए तो कभी लौटकर नहीं आता। धन खो जाए तो पुनः कमाया जा सकता है, स्वास्थ्य बिगड़ जाए तो दवा से सुधारा जा सकता है, लेकिन बीता हुआ समय किसी भी मूल्य पर वापस नहीं लाया जा सकता। इसलिए समय का सदुपयोग करना चाहिए। जो व्यक्ति समय का मूल्य समझता है, वही जीवन में सफलता की ऊंचाइयों को छूता है। विद्यार्थी जीवन में समय का महत्व और भी अधिक है। जो छात्र आज समय को नष्ट कर रहा है, कल समय उसे नष्ट कर देगा। आलस्य समय का सबसे बड़ा शत्रु है। हमें कल का काम आज और आज का काम अभी कर लेना चाहिए, जैसा कि कबीरदास जी ने कहा है- "काल करे सो आज कर, आज करे सो अब।" समय का प्रबंधन ही सफलता की कुंजी है।

Q.7: गद्यांश के अनुसार सबसे मूल्यवान वस्तु क्या है?
Q.8: कबीरदास जी के दोहे का गद्यांश में क्या प्रासंगिकता है?
Q.9: उपयुक्त गद्यांश का सर्वाधिक उपयुक्त शीर्षक क्या हो सकता है?
Q.10: जीवन में सफलता की ऊंचाइयों को कौन छूता है?
Q.11: गद्यांश में समय का सबसे बड़ा शत्रु किसे बताया गया है?
Q.12: "जो छात्र आज समय को नष्ट कर रहा है, कल समय उसे नष्ट कर देगा" - इस पंक्ति का क्या आशय है?
निम्नलिखित गद्यांश / पद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दें: (इस गद्यांश पर आधारित: प्रश्न सं. 13 से 18)

प्रकृति ने हमें शुद्ध हवा, जल, और हरियाली दी है, लेकिन मानव ने अपने स्वार्थ और आधुनिकता की अंधी दौड़ में पर्यावरण को भारी नुकसान पहुँचाया है। आज प्रदूषण एक विकराल समस्या बन चुका है। वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण ने मानव जीवन को संकट में डाल दिया है। कारखानों से निकलने वाला जहरीला धुआँ और नदियों में प्रवाहित किया जाने वाला रासायनिक कचरा पर्यावरण संतुलन को बिगाड़ रहा है। इसके परिणामस्वरूप ग्लोबल वार्मिंग, जलवायु परिवर्तन और नई-नई बीमारियाँ उत्पन्न हो रही हैं। यदि हमने समय रहते प्रकृति के संरक्षण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए, तो भविष्य में पृथ्वी पर जीवन खतरे में पड़ जाएगा। हमें अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए और प्राकृतिक संसाधनों का सीमित व उचित उपयोग करना चाहिए।

Q.13: गद्यांश के अनुसार पर्यावरण को सबसे अधिक नुकसान किसने पहुँचाया है?
Q.14: कारखानों से निकलने वाले कचरे का क्या प्रभाव पड़ रहा है?
Q.15: गद्यांश में 'विकराल' शब्द का प्रयोग किस संदर्भ में हुआ है?
Q.16: ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन का मुख्य कारण गद्यांश में क्या बताया गया है?
Q.17: 'स्वार्थ' शब्द का सही विलोम गद्यांश के संदर्भ में क्या हो सकता है?
Q.18: पृथ्वी पर जीवन को बचाने के लिए लेखक ने क्या सुझाव दिया है?
निम्नलिखित गद्यांश / पद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दें: (इस गद्यांश पर आधारित: प्रश्न सं. 19 से 24)

खड़ा हिमालय बता रहा है,
डरो न आंधी-पानी में।
खड़े रहो तुम अविचल होकर,
सब संकट तूफानी में।
डिगो न अपने प्रण से तो तुम,
सब कुछ पा सकते हो प्यारे।
तुम भी ऊँचे उठ सकते हो,
छू सकते नभ के तारे।
अचल रहा जो अपने पथ पर,
लाख मुसीबत आने में।
मिली सफलता जग में उसको,
जीने में मर जाने में।

Q.19: मनुष्य जीवन में सब कुछ कैसे प्राप्त कर सकता है?
Q.20: हिमालय हमें क्या संदेश दे रहा है?
Q.21: 'नभ के तारे छूना' - इस मुहावरेदार प्रयोग का कविता में क्या भाव है?
Q.22: संसार में सच्ची सफलता किसे मिलती है?
Q.23: पद्यांश में 'अविचल' शब्द का क्या अर्थ है?
Q.24: प्रस्तुत पद्यांश का मूल भाव या केन्द्रीय विचार क्या है?
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