Q.1: बच्चनजी की महत्त्वपूर्ण प्रसिद्ध रचना है:
Q.2: 'मैं स्नेह-सुरा का पान किया करता हूँ।' पंक्ति में अलंकार है-
Q.3: मस्ती का सन्देश लिए फिरता हूँ। मस्ती का सन्देश क्यों कहा है?
Q.4: 'निज उर के उद्‌गार लिये फिरता हूँ।' पंक्ति में उर के उद्‌गार का भाव है-
Q.5: शीतल वाणी में आग से क्या भाव है?
Q.6: हरिवंश राय बच्चन कैसे कवि माने जाते हैं?
Q.7: 'मैं साँसों के दो तार लिए फिरता हूँ।' पंक्ति का आशय है-
Q.8: 'दिन जल्दी-जल्दी ढलता है' का आशय है-
Q.9: 'दिन जल्दी-जल्दी ढलता है' पंक्ति में अलंकार है-
Q.10: भरता उर में विह्वलता है। 'विह्वलता' से क्या होता है?
Q.11: 'उन्मादों में अवसाद' का तात्पर्य है-
Q.12: 'जग जिस पृथ्वी पर जोड़ा करता वैभव।' पंक्ति में जग क्या जोड़ता है?
Q.13: दिन का थका पंथी जल्दी-जल्दी क्यों चलता है?
Q.14: प्रयत्न करने के पश्चात् भी कवि क्या नहीं जान पाया?
Q.15: मैं और, और जग और कहाँ का नाता। 'और' शब्द आवृत्ति से अलंकार है-
Q.16: बच्चे किस प्रत्याशा में होंगे?
Q.17: 'मैं फूट पड़ा' से कवि का भाव है-
Q.18: 'नाव बनाए' कवि ने नाव क्यों बनाई?
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