Q.1: 'पाश' शब्द का क्या अर्थ है (हे मोह! पाश ढील)?
Q.2: 'क्रोध' को कवयित्री क्या न करने के लिए कहती हैं?
Q.3: 'लोभ' के संबंध में कवयित्री की क्या उक्ति है?
Q.4: कवयित्री क्या चाहती हैं कि उन्हें भीख माँगने पर भी क्या न मिले?
Q.5: यदि झोली से गिरी हुई चीज़ को कवयित्री उठाने झुकें, तो वे क्या चाहती हैं?
Q.6: 'ईर्ष्या' के लिए कवयित्री ने किस शब्द का प्रयोग कर उसे रोका है?
Q.7: कवयित्री अक्कमहादेवी 'मोह' को क्या निर्देश देती हैं?
Q.8: कवयित्री सांसारिक मोह-माया को किसके समान मानती हैं?
Q.9: दूसरे वचन का स्वर (Tone) कैसा है?
Q.10: 'कुत्ते द्वारा रोटी झपट लेने' की कामना में कवयित्री का मुख्य उद्देश्य क्या है?
Q.11: कवयित्री अक्कमहादेवी के नाम में 'अक्क' शब्द का क्या अर्थ है?
Q.12: कवयित्री के अनुसार 'नींद' मनुष्य को क्या करती है?
Q.13: कवयित्री ने 'मद' (अहंकार) को क्या कहा है?
Q.14: अक्कमहादेवी के आराध्य देव कौन हैं?
Q.15: पहले वचन में कवयित्री ने 'भूख' को क्या निर्देश दिया है?
Q.16: 'मत चूक अवसर' में किस 'अवसर' की बात की गई है?
Q.17: अक्कमहादेवी किस प्रमुख दार्शनिक और समाज सुधारक के समकालीन थीं?
Q.18: पहले वचन के अंत में कवयित्री चराचर जगत को क्या न चूकने को कहती हैं?
Q.19: "कोई झोली में कुछ दे दे, तो वह गिर जाए" - इस पंक्ति में कवयित्री का क्या भाव झलकता है?
Q.20: अक्कमहादेवी ने अपने आराध्य (चन्नमल्लिकार्जुन) की तुलना जूही के फूल से क्यों की है?
Q.21: कवयित्री चराचर के लिए किसका संदेश लेकर आई हैं?
Q.22: पहले वचन का मूल भाव क्या है?
Q.23: दूसरे वचन में कवयित्री ने ईश्वर को किस फूल के समान बताया है?
Q.24: कवयित्री 'प्यास' से क्या आग्रह करती हैं?
Q.25: कवयित्री अपने वचनों के माध्यम से मानव मन को क्या संदेश देती हैं?
Q.26: 'चन्नमल्लिकार्जुन' का शाब्दिक अर्थ क्या है?
Q.27: अक्कमहादेवी किस भाषा की प्रमुख कवयित्री मानी जाती हैं?
Q.28: अक्कमहादेवी का यह दृष्टिकोण किस भक्ति शाखा के करीब प्रतीत होता है?
Q.29: अक्कमहादेवी के काव्य (वचनों) की मुख्य विशेषता क्या है?
Q.30: दूसरे वचन 'हे मेरे जूही के फूल जैसे ईश्वर' में कवयित्री ईश्वर से कैसी स्थिति की कामना करती हैं?
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